भारत-पाक क्रिकेट मैच में भारत जीत पर ग़म और गुस्से का साया!

यह पहला मौका था जब भारत पाक के बीच हुए एशिया कप क्रिकेट मैच को ना तो उत्साह के साथ देखा गया और ना ही भारत की जीत पर कहीं आतिशबाजी या ख़ुशी की लहर देखी गई। जबकि भारत की युवा पीढ़ी के साथ-साथ बच्चे, बूढ़े भारत-पाक मैच को बड़े मनोयोग से देखते थे।

यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि इसकी वजह पूरा देश जानता है। आपरेशन सिंदूर और पहलगाम में हुए शहीद की  विधवाओं के सिंदूर के नाम पर यह शर्मसार करने वाला मैच था। लेकिन सरकार को इससे क्या लेना देना। मोदी ने लगातार झूठ बोला कि उनकी रगों में गर्म सिंदूर दौड़ रहा है। वे सभी हमलावरों को पकड़ कर सख्त सजा देंगे। सिंदूर आपरेशन नाम देकर देशवासियों को गुमराह किया गया। ना कोई आतंकी पकड़ा गया ना मारा गया।

क्योंकि पाकिस्तान को इस हमले से पहले सचेत कर दिया गया था। इस युद्ध में हमारी सेनाओं के साथ जो छल हुआ उसकी मिसाल कहीं नहीं मिलेगी। आतंकियों को समाप्त करने प्राण प्रण से हमलावर सेनाओं को ट्रम्प की धमकी से भयभीत होकर उसे आगे बढ़ने से रोकने के लिए सीज़फायर कर दिया। जिससे आम नागरिक दुखी हुआ।

जब खुद प्रधानमंत्री ने कहा हो कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते, बातचीत और आतंकवाद साथ-साथ नहीं हो सकते, तो यह मैच खेलकर भारत के जनमानस की आत्मा को जो कष्ट दिया गया। यह भी नहीं सोचा गया कि उन मारे गए 26 परिवारों की इस मैच के होने पर क्या मन: स्थिति होगी जो आप पर यकीन किए बैठे थे।

लगता तो यह है कि सब फरेब था। जो आपने सेना, मृतकों के परिवारों और देश वासियों के साथ किया। हालांकि ऐसे झूठ फरेब से अब तक चुनाव जीतते रहे हैं जिससे अब अवाम भली-भांति वाक़िफ है लेकिन इस बार तो हद कर दी गई। इसी ग़म में लोग इस मैच को नहीं देखे। भारत की जीत पर भी मायूस रहे। सवाल को लोग सीधे आज मोदी-शाह के दुलारे जय शाह से जोड़कर देख रहे हैं। जय शाह जो आईसीसी का अध्यक्ष है उसका फायदा इसे मिलेगा।

अब जिनकी रंगों में व्यापार का लहू दौड़ रहा हो उनसे यह मैच ना खेलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। क्रिकेट मैच से उसे, 2000 से लेकर, 3000 करोड़ तक मिल जाएंगे? वह इस देश बेचने वाली सरकार के लिए ज़रूरी है। उसके आगे हमारे 26 नागरिकों की जान कोई मूल्य नहीं रखती लेकिन देश पुलवामा और पहलगाम के शहीदों को कैसे भूल सकता है। उसे व्यापार में मुनाफा चाहिए और चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकता है। लफ्फाजी भी और वोट चोरी भी। दबी ज़बान से तो यह भी कहा जा रहा है कि आतंकियों से गृहमंत्रालय का जुड़ाव है। इसलिए वे जैश-ए-मोहम्मद का नाम अक्सर कांग्रेस को डराने में कर देते हैं। सोचिए आतंकियों को राहुल गांधी से क्या खतरा हो सकता है और क्यों उन पर हमला करेंगे। ख़तरा तो सरकार को ही हो सकता है। इसलिए लगता है सब गोलमाल है भाई।

आइए इस ग़म और गुस्से का इज़हार करें सरकार को बताएं वह अब इस फरेबी सरकार से ऊब चुके हैं। उसे किसी खेल और देश पाकिस्तान से नफ़रत नहीं है अपनी सरकार द्वारा बोले गए झूठ और घृणास्पद रवैए से घिन आने लगी है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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